Info India News I Astro I 2 जून को गुरु अपनी परमोच्च राशि में जाएंगे, अतिचारी भी रहेंगे, एक साल का सफर 6 माह में करेंगे पूरा, देश-विदेश में सामाजिकता, संस्कृति एवं राशियों पर डालेंगे प्रभाव
गुरु ग्रह के राशि परिवर्तन से बदलेगा मौसम
2026 में गुरु का त्रियोगी परिवर्तन होगा अर्थात गुरु 2026 में 3 राशियों से गुजरेगा। गुरु को तीन राशियों में पहुंचने में लगभग तीन साल लगते हैं, अतिचारी, शीघ्रगामी होने के कारण ऐसी स्थिति बनेगी।
Bhopal। 11 मार्च 2026 को सुबह 9:06 मिथुन राशि में मार्गी हुए थे फिर 2 जून 2026 को रात 1:49 बजे मिथुन से कर्क राशि में प्रवेश करेंगे। यह गुरु की परमोच्च राशि है। 31 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12:02 बजे कर्क से सिंह राशि में प्रवेश करेंगे। पुन: 13 दिसंबर 2026 को सुबह 6:17 बजे से फिर सिंह में वक्री होंगे। इस प्रकार से 2026 ई. में एक वर्ष के अंदर गुरु 3 राशियों में भ्रमण करेंगे।
ज्योतिष मठ संस्थान के संचालक ज्योतिषाचार्य पं. विनोद गौतम ने बताया कि सबसे बड़ा परिवर्तन 2 जून 2026 को गुरु कर्क में जाएगा। कर्क गुरु की परमोच्च राशि है, यहाँ गुरु सबसे शक्तिशाली होता है। राशि परिवर्तन के समय मौसम में भी परिवर्तन देखने को मिलेंगे। कई जगह तेज हवाओं के साथ बारिश भी होगी।
गुरु के राशि परिवर्तन से होने वाले प्रभाव
पं. गौतम के अनुसार 2 जून को गुरु परमोच्च राशि कर्क में भ्रमणरत हो जाएंगे। गुरु के कर्क राशि में रहने तक धर्म-कर्म, सामाजिकता, संस्कार, संस्कृति आदि में विशेष प्रभाव देखने को मिलेंगे। गुरु ज्ञान, संतान, धर्म, विवाह, गुरु और भाग्य का कारक है। यह उच्च राशि पर स्थित होने से जिन जातकों के विवाह में बाधाएं आ रही हैं, उनकी बाधाएं दूर करने में सहायक होंगे। साथ ही संतान की रुकावट भी दूर करेंगे। धर्म-कर्म एवं धर्मस्व के मामले में विशेष कार्य होंगे। पं. गौतम ने बताया कि भारतीय संस्कृति को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने में गुरु मददगार होंगे एवं अन्य देशों में भी भारतीय संस्कृति को अपनाने की होड़ मचेगी। सामाजिक सुधार तेजी से होंगे। आर्थिक वृद्धि के साथ शुभ कार्य में भी गुरु सहयोगी रहेंगे। गुरु अपनी परमोच्च राशि में लगभग 10 वर्ष 10 महीने 19 दिन बाद आ रहे हैं। अर्थात 3974 दिन बाद गुरु फिर से अपनी परमोच्च राशि कर्क में आएंगे। यह शुभता का प्रतीक है। अपनी परमोच्च राशि में गुरु 191 दिन करीब 5 महीने भ्रमण कर सिंह राशि में चले जाएंगे। गुरु की स्थिति इस दौरान सबसे तेज चाल अर्थात अतिचारी स्थिति में होगी। इसके पूर्व नीच राशि पर गुरु 2020 ई. में भ्रमणरत था तब कोरोना आदि महामारी आई थी। गुरु जिस भाव में जाता है उसे बढ़ाता है, और जहाँ दृष्टि डालता है, 5वीं, 7वीं, 9वीं दृष्टि से उन भावों को शुभ करता है।
गुरु के राशि परिवर्तन से द्वादश राशियों पर प्रभाव
2 जून से 31 अक्टूबर तक गुरु कर्क राशि में भ्रमणरत रहेंगे।
मेष: चतुर्थ भाव में उच्च गुरु होंगे। माता, घर, वाहन, प्रॉपर्टी सुख। नौकरी में बदलाव। हंसक योग बनेगा जो शुभ है।
वृष: तीसरे भाव में गुरु का प्रभाव होगा। भाई-बहन से लाभ, छोटी यात्रा, लेखन-कम्युनिकेशन में तरक्की। पराक्रम बढ़ेगा।
मिथुन: दूसरेे भाव में धन-संचय, कुटुंब सुख, वाणी मधुर होगी। खान-पान का ध्यान रखने से लाभ होगा।
कर्क : लग्न में उच्च गुरु का प्रभाव रहेगा। सेहत, व्यक्तित्व, नाम-यश। शादी, संतान योग शुभकारी रहेंगे।
सिंह: बारहवें भाव में प्रभावित करेंगे। खर्च, विदेश यात्रा, अस्पताल-आध्यात्मिक शुभता और शुभ कार्यों पर खर्च होगा।
कन्या: ग्यारहवें भाव में गुरु का प्रभाव लाभ, इनकम, बड़े भाई-बहन, इच्छापूर्ति के साथ नए आमदनी के योग्य बनेंगे।
तुला: दसवें भाव में उच्च गुरु होने से करियर में उछाल, प्रमोशन, मान-सम्मान, पद प्रतिष्ठा में वृिद्ध होगी।
वृश्चिक: नौवें भाव में गुरु भाग्य, धर्म, लंबी यात्रा, पिता से लाभ एवं उच्च शिक्षा विदेश योग आदि शुभ कारक होंगे।
धनु: आठवें भाव में गुरु की स्थिति अनुसंधान, गूढ़ विद्या, ससुराल पक्ष से अचानक धन प्राप्ति, एवं सुख योग बनेंगे।
मकर: सातवें भाव का गुरु शादी-विवाह में रुकावट दूर करता है, पार्टनरशिप, व्यापार, जीवनसाथी से लाभ होगा।
कुंभ: छठवें रोग भावस्थ गुरु नौकरी, कर्ज, रोग, शत्रु से परेशानी दे सकते हैं। कड़ी मेहनत से सफलता प्राप्त होगी।
मीन: पांचवें भाव में उच्च गुरु संतान योग निर्मित कर, शिक्षा, प्रेम, शेयर बाजार आदि में विशेष सफलताकारी होंगे।
पं. विनोद गौतम
ज्योतिष मठ संस्थान, भोपाल
मो. 9827322068
