Astro-त्रिग्रही योग और मानसून पर असर

Info India News I मिथुन में सूर्य का गोचर: त्रिग्रही योग और मानसून पर असर

ग्रहों के राजा सूर्य 15 जून, सोमवार को सायं 7:00 बजे मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, मिथुन राशि में सूर्य बुध और चंद्र के साथ मिलकर त्रिग्रही योग का निर्माण करेंगे।

मानसून पर ज्योतिषीय प्रभाव

संस्थान के मुख्य ज्योतिषाचार्य पं. विनोद गौतम ने बताया कि वर्तमान में सूर्य मृगशिरा नक्षत्र में संचरण कर रहे हैं। यह नक्षत्र वर्षा के गर्भ के विकास का सूचक है। 22 जून को सूर्य के आद्रा नक्षत्र में प्रवेश करते ही मानसून का आगमन माना जाएगा। इससे मध्य प्रदेश के मध्य क्षेत्र में वर्षा की स्थिति अनुकूल रहने की संभावना है।

सूर्य, चंद्र और बुध का जलीय योग मिलकर वर्षा को प्रोत्साहित करेगा। हालांकि, राहु-केतु के मध्य सभी ग्रहों के ‘बंधन’ में होने के कारण मानसून के मार्ग में अवरोध की स्थिति बन रही है। इसके चलते मानसून या तो समय पर आकर लौट सकता है, या रास्ता भटक सकता है, अथवा देरी से प्रवेश कर सकता है।

युद्ध-संकट और वैश्विक स्थिति

पं. गौतम के अनुसार, वर्तमान ग्रह स्थिति देश-दुनिया के लिए अपेक्षाकृत अनुकूल है। सूर्य से मंगल काफी पीछे है, जबकि शनि मंगल का पीछा कर रहा है और राहु शनि का। यह क्रम चल रहे युद्ध और संकट को कमजोर करने में सहायक सिद्ध हो सकता है। फिर भी, पूरे वर्ष विदेशों के साथ आपसी तनातनी की स्थिति बनी रहने के संकेत हैं।

कालसर्प दोष और अन्य महत्वपूर्ण तिथियाँ

21 जून को चंद्रमा के कन्या राशि में प्रवेश करते ही आंशिक रूप से बंधक योग समाप्त होगा। परंतु चंद्रमा को छोड़कर शेष सभी ग्रह राहु-केतु के बीच बंधक रहेंगे। इस अवधि में जन्म लेने वाले नवजात शिशुओं की कुंडली में कालसर्प दोष बनने की संभावना रहेगी।

आद्रा प्रवेश और वर्षा का प्रमाण

22 जून, सोमवार को उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र और कन्या राशि के चंद्रमा की उपस्थिति में सूर्य आद्रा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। इसी दिन वर्षा का प्रथम नक्षत्र प्रारंभ होगा, जो 6 जुलाई तक रहेगा।

संवत्सर का वास वैश्य के घर है। रोहिणी का निवास संधि में रहेगा। 12 मेघों में ‘तक्षक’ नामक मेघ वर्षा कराएगा, जबकि नव मेघों में ‘मध्यकाल’ मेघ सक्रिय रहेगा। संवत्सर के मेघ स्वामी चंद्रमा हैं, अतः वर्षा नौका पर सवार होकर आएगी।

कुल वर्षा का प्रमाण 50 ‘विश्वा’ आंका गया है, जिसमें पर्वतीय क्षेत्रों में 25, समुद्र में 12 और भूमि पर 12 विश्वा वर्षा होगी। इसका अर्थ है कि कहीं-कहीं अत्यधिक वर्षा से हानि की आशंका भी बन रही है।

आद्रा नक्षत्र स्त्री संज्ञक है और सूर्य-चंद्र योग के प्रभाव में है। इसका वाहन ‘खर’ है। सौम्या नाड़ी और गुरु के नक्षत्र अधिपति होने से इस नक्षत्र में सामान्य वर्षा के योग बन रहे हैं। 22 जून को वर्षा प्रवेश के समय दिन सोमवार, तिथि नवमी, नक्षत्र हस्त और वारियान योग होने से सामान्य वर्षा का योग है।

 

पं. विनोद गौतम 

ज्योतिष मठ संस्थान, भोपाल 

मोबाइल: 9827322068