MP News: भोपाल में बारिश का हाहाकार! सड़कों पर सैलाब, घरों में घुसा पानी… खुली जल निकासी व्यवस्था की पोल

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भोपाल। राजधानी भोपाल में मानसून की बारिश ने एक बार फिर शहर की व्यवस्थाओं की परीक्षा ले ली है। बीते घंटों में हुई तेज बारिश ने कई इलाकों की तस्वीर बदल दी। कहीं सड़कें तालाब बन गईं तो कहीं निचली बस्तियों और घरों में पानी घुस गया। हालात ऐसे बने कि लोगों को अपने वाहनों के साथ-साथ रोजमर्रा के जरूरी कामों को लेकर भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। हालिया रिपोर्ट के मुताबिक भोपाल में करीब 12 घंटे में 7 इंच से ज्यादा बारिश दर्ज की गई, जिसके बाद कई हिस्सों में जलभराव की गंभीर स्थिति सामने आई।

बारिश का सबसे ज्यादा असर शहर की सड़क और यातायात व्यवस्था पर दिखाई दिया। कई प्रमुख मार्गों पर पानी जमा होने से वाहन रेंगते नजर आए। जलभराव वाले रास्तों पर दोपहिया वाहन चालकों के लिए मुश्किलें बढ़ गईं, जबकि कार और बड़े वाहनों को भी पानी के बीच से निकलना पड़ा। जगह-जगह ट्रैफिक की रफ्तार धीमी होने से लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में अतिरिक्त समय लगा।

सबसे बड़ी चिंता उन इलाकों को लेकर रही, जहां बारिश का पानी तेजी से निकल नहीं सका। नालियों और ड्रेनेज सिस्टम की क्षमता पर सवाल खड़े हुए। भोपाल के पुराने शहर और निचले इलाकों में जलभराव की समस्या नई नहीं है। पिछले मानसून में भी भोपाल स्टेशन, अल्पना टॉकीज, नादरा बस स्टैंड और आसपास के क्षेत्रों में पानी भरने की खबरें सामने आई थीं।

बारिश ने सिर्फ सड़कों को ही प्रभावित नहीं किया, बल्कि कई परिवारों की परेशानी भी बढ़ा दी। घरों में पानी पहुंचने से लोगों को सामान सुरक्षित स्थानों पर रखना पड़ा। दुकानदारों के सामने भी दुकान में पानी घुसने और कारोबार प्रभावित होने का खतरा बना रहा। वहीं, खुले मैनहोल, गड्ढे और पानी में छिपी टूटी सड़कें राहगीरों के लिए दुर्घटना का कारण बन सकती हैं।

अब सवाल सिर्फ बारिश का नहीं, बल्कि बारिश के पानी की निकासी की तैयारी का है। हर साल मानसून से पहले नालों की सफाई और जल निकासी व्यवस्था को लेकर तैयारियों के दावे किए जाते हैं, लेकिन तेज बारिश होते ही कई इलाकों में वही पुरानी तस्वीर दिखाई देने लगती है।

भोपाल के लोगों के लिए बारिश जहां गर्मी से राहत लेकर आई है, वहीं जलभराव ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ऐसे में जरूरत है कि प्रशासन संवेदनशील इलाकों की पहचान कर स्थायी जल निकासी व्यवस्था तैयार करे, नालों की नियमित सफाई हो और जलभराव वाले स्थानों पर तत्काल राहत एवं ट्रैफिक प्रबंधन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

क्योंकि भोपाल को सिर्फ बारिश से नहीं, बल्कि बारिश के बाद पैदा होने वाली समस्याओं से भी सुरक्षित रखना जरूरी है।