Info India News I नाग पंचमी पर खुलता है उज्जैन का रहस्यमयी नागचंद्रेश्वर मंदिर, जानिए 11वीं शताब्दी से जुड़ा इतिहास और साल में सिर्फ एक बार खुलने का रहस्य
उज्जैन को बाबा महाकाल की नगरी कहा जाता है, लेकिन इसी धार्मिक नगरी में एक ऐसा अनोखा मंदिर भी है, जिसके कपाट सालभर में सिर्फ एक बार श्रद्धालुओं के लिए खोले जाते हैं। यह मंदिर है नागचंद्रेश्वर मंदिर, जो विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर के ऊपरी तल पर स्थित है। नाग पंचमी के दिन इस मंदिर के कपाट खुलते हैं और श्रद्धालुओं को भगवान नागचंद्रेश्वर के दुर्लभ दर्शन का अवसर मिलता है।
11वीं शताब्दी से जुड़ा है इतिहास
नागचंद्रेश्वर मंदिर को बेहद प्राचीन माना जाता है। उपलब्ध ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, मंदिर के निर्माण का संबंध परमार वंश के राजा भोज से जोड़ा जाता है और इसका निर्माण लगभग 1050 ईस्वी के आसपास माना जाता है। वहीं मंदिर में स्थापित नागचंद्रेश्वर की दुर्लभ प्रतिमा को 11वीं शताब्दी की बताया जाता है। कुछ परंपराओं के अनुसार यह प्रतिमा नेपाल से उज्जैन लाई गई थी। बाद में 1732 में महाराज राणोजी सिंधिया द्वारा महाकाल मंदिर के जीर्णोद्धार का उल्लेख भी मिलता है।
क्या है प्रतिमा की खासियत?
नागचंद्रेश्वर मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां स्थापित भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा है। इसमें भगवान शिव और माता पार्वती को नाग की शैय्या पर विराजमान दिखाया गया है। सामान्य तौर पर नाग की शैय्या पर भगवान विष्णु के विराजमान होने की धार्मिक कल्पना प्रसिद्ध है, लेकिन यहां भगवान शिव नाग पर विराजमान हैं। इसी वजह से यह प्रतिमा अत्यंत दुर्लभ और विशेष मानी जाती है।
साल में सिर्फ एक बार क्यों खुलता है मंदिर?
नागचंद्रेश्वर मंदिर के साल में सिर्फ एक बार खुलने के पीछे धार्मिक मान्यता जुड़ी हुई है। पौराणिक कथा के अनुसार नागराज तक्षक ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या की थी। भगवान शिव ने उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें अमरत्व का वरदान दिया। इसके बाद तक्षक नाग भगवान शिव की शरण में रहने लगे।
मान्यता है कि तक्षक नाग ने भगवान शिव की आराधना के लिए एकांत की इच्छा व्यक्त की थी। इसी वजह से परंपरा के अनुसार मंदिर के कपाट पूरे साल बंद रखे जाते हैं और केवल श्रावण शुक्ल पंचमी यानी नाग पंचमी के दिन श्रद्धालुओं के लिए खोले जाते हैं।
24 घंटे के लिए मिलते हैं दर्शन
परंपरा के अनुसार नाग पंचमी पर मंदिर के कपाट रात 12 बजे खोले जाते हैं और करीब 24 घंटे बाद फिर बंद कर दिए जाते हैं। कपाट खुलने से पहले विशेष पूजा और त्रिकाल पूजा की जाती है। इसके बाद देशभर से आने वाले श्रद्धालु भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन करते हैं।
यही वजह है कि नाग पंचमी के दिन उज्जैन में नागचंद्रेश्वर मंदिर के दर्शन को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह रहता है। साल में केवल एक बार मिलने वाला यह अवसर उज्जैन की धार्मिक परंपरा, इतिहास और पौराणिक आस्था को एक साथ जोड़ता है। हालांकि मंदिर से जुड़ी कई बातें धार्मिक मान्यताओं और लोकपरंपराओं पर आधारित हैं, लेकिन इसकी प्राचीन प्रतिमा और साल में एक बार कपाट खुलने की परंपरा इसे देश के सबसे अनोखे धार्मिक स्थलों में शामिल करती है।
