Info India News I Bollywood I धर्मेंद्र और केकेके सीरीज की वो यादगार फिल्में
अभिनेता धर्मेंद्र और निर्माता निर्देशक अर्जुन हिंगोरानी के मध्य विशेष बॉन्डिंग थी।
अर्जुन हिंगोरानी द्वारा निर्देशित पांच फिल्मों में के के के K K K श्रेणी का फिल्मों का नामकरण हुआ। ये लहर पंद्रह साल चलती रही। इन सभी में धर्मेंद्र अभिनेता थे ।
यह सिलसिला वर्ष 1970 में कब क्यों और कहां से शुरू हुआ जिसमें धर्मेंद्र के साथ बबीता नायिका थीं।
वर्ष 1973 में “कहानी किस्मत की” आई जिसमें धर्मेंद्र के साथ रेखा अभिनेत्री थीं।
वर्ष 1977 में “खेल खिलाड़ी का” फिल्म में धर्मेंद्र के साथ शबाना आजमी ने अभिनय किया।
वर्ष 1981 में “कातिलों के कातिल” आई जिसमें जीनत अमान धर्मेंद्र की नायिका बनी थीं।
वर्ष 1985 में यह सिलसिला थम गया जब “करिश्मा कुदरत का” फिल्म में अनीता राज ने धर्मेंद्र के साथ नायिका की भूमिका अदा की।
के के के एक हिट फार्मूला बन गया था। इन फिल्मों में अर्जुन हिंगोरानी भी अभिनय किया करते थे। धर्मेंद्र जी उनका बहुत सम्मान करते थे।
के के के श्रेणी में सबसे ज्यादा लोकप्रिय हुई फिल्म थी “कहानी किस्मत की”, जिसके नाम का टाइटल सॉन्ग फिल्म के प्रारंभ और पूरी कथा में गूंजता है।
सिनेमा में कर दिखाईं विविध प्रकार की भूमिकाएं
एक ग्रामीण युवक से लेकर शहर में रहने वाले सूट बूट धारी लाट साहब तक हर तरह की भूमिका को निभाने में धर्मेंद्र माहिर थे।वे सफल भी हुए क्योंकि वे हर चरित्र को जी जान से निभाते थे।
अलग अंदाज में अभिनय प्रतिभा के धनी धर्मेंद्र भारतीय सिने जगत के ऐसे लोकप्रिय अभिनेता थे जिन्होंने घोर व्यवसायिक फिल्मों के साथ सत्यकाम जैसी कला फिल्मों में भी कार्य किया। फिल्म चुपके-चुपके में उनकी भूमिका सबसे अलग थी। फिल्म दोस्त में बजाया माउथ आर्गन भारत की धुन बन गई थी। दुश्मन फिल्म के दृश्य याद कीजिए। विचारों के द्वंद्व में फंसे नायक के मनोभाव इतने विशिष्ट अंदाज में धर्मेंद्र ही उकेर सकते थे। ये खास बात है कि अपने जीवन में तीन चौथाई से अधिक समय अभिनय को समर्पित करने वाले धर्मेंद्र ने उस पंजाबियत को बिल्कुल नहीं छोड़ा जो बाल्यकाल का एहसास दिलवाती थी। अपनी मातृभाषा से भी उनको बेहद लगाव था। धर्मेंद्र ने ऐसे पुत्र पुत्रियों को जन्म दिया जो अभिनय की दुनिया में सफल हुए हैं।
जीवन में कई बार ऐसा घटनाक्रम होता है जिसके बारे में कोई पूर्वानुमान नहीं लग सकता। ऐसा ही धर्मेंद्र के साथ हुआ।उनके जीवन में दो विवाह का प्रसंग असामान्य होते हुए भी सामान्य बन गया क्योंकि उनकी लोकप्रियता इतनी ज्यादा थी। इसे दुनिया ने सहज स्वीकार किया। हेमा जी से उनके रिश्ते फिल्म शोले प्रदर्शित होने के पहले से थे जिसे अभिव्यक्ति शोले के पश्चात मिली।
मध्य प्रदेश से रहा लगाव
अभिनेता धर्मेंद्र को मध्य प्रदेश से लगाव था। जब कभी वे किसी प्रयोजन से मध्य प्रदेश आए उन्हें अपने चाहने वालों से संवाद का अवसर भी मिला। राजधानी भोपाल में सिने समीक्षक स्व. सुनील मिश्र से धर्मेंद्र के दोस्ताना संबंध रहे। सुनील जी मुंबई जाते रहे , उनकी जन्म वर्षगांठ पर हमेशा वहीं जाकर उन्हें बधाई देते थे। उन्होंने धर्मेंद्र की बायोग्राफी लिखना चाही,लेकिन लिखते लिखते अंततः नहीं लिख सके। वर्ष 2021 में सुनील जी कोविड में विदा हो गए और धर्मेंद्र का नाता भोपाल से मानो टूट गया।
पिता पुत्र के दीवाने भोपाली
धर्मेंद्र के पुत्र सनी देओल के भी बहुत दीवाने हैं। दोनों पिता पुत्र के एक खास दीवाने जवाहर चौक,भोपाल में एक छोटी सी मोटर वर्कशॉप चलने वाले बताते हैं कि वे आज भी धर्मेंद्र और सनी के पोस्टर अपने मित्रों को बांटते हैं ।भोपाल के बहुत से ऑटो चालक मिलकर धर्मेंद्र फैन क्लब बना चुके हैं और उन्होंने ऑटो के पिछले हिस्से में धर्मेंद्र की फोटो लगा रखी है।
मध्य प्रदेश शासन ने दिया सम्मान
अभिनेता धर्मेंद्र को साल 2022 के लिए मध्य प्रदेश शासन का राष्ट्रीय किशोर सम्मान संस्कृति विभाग ने प्रदान किया था।
अस्वस्थ रहने के कारण धर्मेंद्र भोपाल नहीं आ सके लेकिन उन्होंने उत्कृष्ट अभिनय के लिए दिया गया यह सम्मान सहज स्वीकार किया। मुंबई में ही मध्यप्रदेश के संस्कृति विभाग ने उन्हें सम्मान प्रदान किया।
बॉबी के नए अवतार से खुश थे
धर्मेंद्र , हाल ही में अपने बेटे बॉबी देओल अभिनीत फिल्म एनिमल में दिखे उनके नए अवतार से बहुत प्रसन्न थे। इसके पहले तक बॉबी देओल ने चॉकलेटी हीरो की भूमिकाएं ही अधिक की थीं। वे पिता का प्रतिरूप नहीं बन सके थे। सनी देओल ने जरूर यह करिश्मा कई फिल्मों में कर दिखाया था। इस नाते धर्मेंद्र ने जब एनिमल देखी तो बॉबी के अभिनय की तारीफ किए बिना नहीं रह सके और हर जगह बॉबी के टैलेंट का जिक्र करते थे। यमला पगला दीवाना से उन्होंने एक ऐसी कथा फिल्म के माध्यम से प्रस्तुत की जो पूरे परिवार की कला प्रतिभा का प्रमाण बनी।
पिता और दोनों पुत्र आए दो फिल्मों में साथ-साथ
धर्मेंद्र, सनी देओल और बॉबी देओल साल 2007 में फिल्म “अपने” और वर्ष 2011 में “यमला पगला दीवाना” में साथ आए। वर्ष 1975 की प्रतिज्ञा फिल्म के गीत मैं जट यमला पगला दीवाना… से प्रेरित “यमला पगला दीवाना” फिल्म को दर्शकों ने बहुत पसंद किया।
धर्मेंद्र से जीवन में एक बार ही मेरी भेंट हुई।साधना अभिनेत्री की बायोग्राफी लिखने के सिलसिले में मुंबई में कई आर्टिस्ट से भेंट की थी। ऑटर्स क्लब मुंबई में मुलाकात में मैंने धर्मेंद्र जी से पूछा कि “इश्क पर जोर नहीं” फिल्म की भूमिका को किस तरह याद करते हैं तो उन्होंने कहा कि बेजोड़ अभिनेत्री साधना के साथ उन्हें यह एक ही फिल्म करने का सौभाग्य मिला। इसे वे यादगार मानते हैं। फिल्म यूनिट पर उनकी साधना से बढ़िया बॉन्डिंग होती थी।
हेमा जी से उनकी जोड़ी सर्वाधिक जमी और वे जीवन साथी भी बने। ये अलग बात है,लेकिन अपने जीवन में मीना कुमारी से लेकर पूनम ढिल्लो तक धर्मेंद्र ने ऐसे अद्भुत अभिनय यात्रा को अंजाम दिया जो सिने जगत में अब तक देखी नहीं गई।
अशोक मनवानी
(लेखक बायोग्राफी और सिनेमा लेखन से जुड़े हैं।)
