Info India News I Astro I मंगल-वृष गोचर और बुध वक्री : विश्व परिदृश्य पर दोहरी ग्रह चाल मंगल छोड़ेंगे गद्दी, बुध होंगे वक्री
व्यापार जगत के देवता होंगे नाराज, चलेंगे उल्टी चाल
मंगल कराएंगे फिर से दंगल?
जून माह के उत्तरार्ध में दो प्रमुख ग्रह परिवर्तन वैश्विक समीकरण बदलने जा रहे हैं। 20 जून को (शनिवार की रात्रि) 1.55 बजे रात्रि से मंगल का वृष राशि में प्रवेश और उसके कुछ दिन बाद मिथुन राशि में 28 जून को बुध का वक्री होना सैन्य-राजनीति और अर्थव्यवस्था दोनों क्षेत्रों में हलचल पैदा करेगा।
ज्योतिष में मंगल को भूमि, ऊर्जा, अग्नि, गोला-बारूद, पुलिस और सैनिक कार्रवाई का कारक माना गया है। मंगल 20 जून को अपनी गद्दी छोड़कर मेष राशि से निकलकर वृष में प्रवेश करेगा।
ज्योतिष मठ संस्थान भोपाल के पं. विनोद गौतम, ने बताया कि वृष राशि, शुक्र की स्थिर और भोग प्रधान राशि है। यहाँ मंगल अपनी उग्रता को सीधे नहीं दिखाता है, बल्कि राहु-केतु से बंधक बनाए जाने तथा चारों तरफ से बंदी बनाए जाने पर अपनी गद्दी छोड़ रहे हैं। परन्तु यह ग्रह जिद और धैर्य के साथ वार करता है। वृष पृथ्वी तत्व की राशि है। मंगल के यहाँ आने से भूमि, सीमा, खनिज संसाधनों को लेकर तनाव बढ़ेगा। सैनिक मोर्चे पर ‘घेराबंदीÓ और ‘लंबे समय तक टिके रहनेÓ वाली रणनीति राष्ट्रों में हावी रहेगी।
मंगल ऊर्जाकारक ग्रह है और वृष धन-संपदा कारक है। इससे तेल, गैस, अनाज, धातु जैसी वस्तुओं की कीमतों में उछाल और भंडारण को लेकर देशों के बीच खींचतान संभव है। भारत में प्रभाव को लेकर उन्होंने बताया कि पुलिस और अर्धसैनिक बलों की सक्रियता बढ़ेगी। दंगों, हड़तालों और औद्योगिक अशांति की संभावना बन रही है, क्योंकि मंगल की आग स्थिरता को तोड़ने का प्रयास करेगी। वर्तमान में सूर्य, बुध, चंद्र मिथुन में हैं और शनि, राहु-केतु के बंधन में है। 21 जून को चंद्रमा के राशि परिवर्तन से 15 दिन के लिए बंधन योग समाप्त होगा। ऐसे में मंगल का वृष में जाना एक ‘स्थिर मोर्चाÓ बनाएगा। राहु शनि का पीछा कर रहा है, इसलिए छद्म युद्ध और साइबर अटैक की आशंका भी बढ़ती है।
बुध का मिथुन में वक्री होना – व्यापार जगत पर संकट
ज्योतिष मठ संस्थान के अनुसंधान के अनुसार व्यापार जगत के देवता वक्री होंगे अर्थात उल्टी चाल चलेंगे। माह के अंत में 28 जून को 1.24 बजे दिन से वक्र गति से अपनी स्वयं की राशि मिथुन में विचरण करेंगे। बुध को व्यापार, वाणिज्य, संचार, बैंकिंग और मीडिया का देवता माना जाता है।
संस्थान के ज्योतिषाचार्य एवं भविष्यवक्ता पं. विनोद गौतम ने बताया कि बुध के वक्री होने से वैश्विक बाजार एवं बुद्धिमत्ता में तेजी आएगी। बुध के वक्री होने से भ्रम, सौदों में देरी और गलतफहमी पैदा होगी। वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव और अनुबंधों में पेंच फंसने की स्थिति बनेगी। मिथुन संचार की राशि है। यहाँ वक्री बुध इंटरनेट, डेटा, सोशल मीडिया, हवाई-रेल सेवा और कूटनीतिक वार्ता में तकनीकी खामी या गलत जानकारी दे सकता है, अत: सावधानी रखें। वक्री ग्रह पीछे की ओर चलता है। अत: रुके हुए व्यापार समझौते, पुराने टैरिफ विवाद और बंद पड़ी कंपनियों के मामले फिर से खुलेंगे।
पं. विनोद गौतम ने बताया कि 20 जून के बाद मंगल वृष में और बुध मिथुन में रहेंगे। ये दोनों राशि आपस में 3-11 का संबंध बनाती हैं, जिसे ज्योतिष में ‘लाभ-हानिÓ का कोण कहते हैं। इसके वैश्विक परिणामों में मंगल युद्ध का खर्च बढ़ाएगा और वक्री बुध उस खर्च की भरपाई में बाधा डालेगा। देशों के बजट पर दबाव बढ़ेगा। साथ ही मंगल रास्ता रोकता है, बुध रास्ता बताता है। जब बुध वक्री हो तो रास्ता भटकता है। अत: बंदरगाहों, शिपिंग रूट और सप्लाई चेन में व्यवधान से महंगाई बढ़ सकती है। मिथुन मीडिया की राशि है। वक्री बुध के साथ मंगल की दृष्टि होने से प्रोपेगेंडा, फेक न्यूज और सूचना युद्ध चरम पर रहेगा।
पं. गौतम के अनुसार कुल मिलाकर, 20 जून के बाद का समय ‘एक्शनÓ और ‘रिएक्शनÓ का होगा। मंगल जमीन पर मोर्चा संभालेगा और बुध कागज पर सौदे बिगाड़ेगा। विश्व स्तर पर यह अवधि न तो पूर्ण युद्ध की है, न पूर्ण शांति की। यह ‘ठहरे हुए तनावÓ की स्थिति है। निवेशकों, व्यापारियों और नीति-निर्माताओं को नए सौदे सोच-समझकर करने की सलाह है। पुराने कागजात दोबारा जांचें, क्योंकि वक्री बुध में हस्ताक्षर की भूल महंगी पड़ती है।
पं. विनोद गौतम
ज्योतिष मठ संस्थान, भोपाल
मो. 9827322068
