MP News मीटर लगाने के नाम पर रिश्वत का खेल!

Info India News I Bhopal I भोपाल में MPEB पर लोकायुक्त का बड़ा एक्शन: मीटर लगाने के नाम पर रिश्वत, 15 हजार लेते AE और JE रंगे हाथ गिरफ्तार
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में बिजली विभाग में रिश्वतखोरी का एक बड़ा मामला सामने आया है। लोकायुक्त पुलिस ने विद्युत मंडल के छोला कार्यालय में कार्रवाई करते हुए दो अधिकारियों को 15 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा। आरोप है कि नया बिजली मीटर लगाने और मकान से जुड़े पुराने बिजली प्रकरण में कार्रवाई से राहत देने के बदले रिश्वत की मांग की गई थी।
जानकारी के अनुसार शिकायतकर्ता तारिक सिद्दीकी अपने मकान में किरायेदार रखने के लिए नया बिजली मीटर लगवाना चाहता था। इसके लिए वह छोला स्थित विद्युत विभाग के कार्यालय पहुंचा था। आरोप है कि वहां अधिकारियों ने मकान से जुड़े एक पुराने मामले का हवाला देते हुए कहा कि कार्रवाई और चालान की प्रक्रिया हो सकती है। शिकायत के मुताबिक, कार्रवाई से बचाने और नया बिजली मीटर लगवाने के बदले उससे 20 हजार रुपये रिश्वत मांगी गई।
शिकायतकर्ता रिश्वत देने के लिए तैयार नहीं था। इसके बाद उसने 7 सितंबर को भोपाल लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई। लोकायुक्त टीम ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए आरोपों का सत्यापन कराया। शिकायत सही पाए जाने के बाद अधिकारियों को पकड़ने के लिए योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप कार्रवाई की तैयारी की गई।
इसके बाद 9 सितंबर को लोकायुक्त की टीम ने छोला स्थित विद्युत कार्यालय में कार्रवाई की। जैसे ही रिश्वत की राशि ली गई, पहले से तैयार लोकायुक्त टीम ने दोनों आरोपियों को रंगे हाथ पकड़ लिया। कार्रवाई में 15 हजार रुपये की रिश्वत राशि लेते हुए दो अधिकारियों को पकड़ा गया। इस कार्रवाई के बाद बिजली विभाग के कार्यालय में हड़कंप मच गया।
रिपोर्टों के अनुसार पकड़े गए अधिकारियों में विद्युत विभाग के सहायक अभियंता (AE) राजेंद्र वरवड़े/बरबड़े और कनिष्ठ अभियंता (JE) अमित कुमार उपाध्याय शामिल बताए गए हैं। अलग-अलग प्रकाशित रिपोर्टों में नामों की वर्तनी में कुछ अंतर है, लेकिन कार्रवाई बिजली मीटर लगाने के मामले में रिश्वत लेने के आरोप से जुड़ी बताई गई है।
लोकायुक्त ने दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 के तहत कार्रवाई शुरू की है। ट्रैप कार्रवाई का नेतृत्व उप पुलिस अधीक्षक वीरेन्द्र सिंह ने किया, जबकि टीम में निरीक्षक घनश्याम सिंह मर्सकोले सहित अन्य अधिकारी और कर्मचारी शामिल रहे।
यह कार्रवाई एक बार फिर सरकारी कार्यालयों में होने वाली रिश्वतखोरी पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। आम नागरिक बिजली का नया कनेक्शन या मीटर लगवाने जैसे जरूरी काम के लिए विभागों के चक्कर लगाते हैं। ऐसे में यदि किसी व्यक्ति से उसके वैध काम के बदले कथित तौर पर रिश्वत मांगी जाती है, तो यह व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल है।
भोपाल में लोकायुक्त की इस कार्रवाई का सबसे बड़ा संदेश साफ है—जरूरी सरकारी सेवा के बदले रिश्वत मांगने वालों पर कार्रवाई हो सकती है। शिकायतकर्ता की सतर्कता और लोकायुक्त की योजनाबद्ध ट्रैप कार्रवाई के कारण मामला सामने आया और दोनों आरोपी रंगे हाथ पकड़े गए। अब आगे की कानूनी कार्रवाई और जांच पर सभी की नजर रहेगी।